दिल्ली-एनसीआर

फ्लाइट क्रू के आकस्मिक मादक पदार्थ परीक्षण का दायरा बढ़ाने की तैयारी

Kavita2
20 Aug 2026 9:52 AM IST
फ्लाइट क्रू के आकस्मिक मादक पदार्थ परीक्षण का दायरा बढ़ाने की तैयारी
x

नई दिल्ली। विमानन सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से नागरिक उड्डयन मंत्रालय फ्लाइट क्रू सदस्यों के लिए आकस्मिक मादक पदार्थ परीक्षण (रैंडम ड्रग टेस्टिंग) का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय वर्तमान व्यवस्था में बदलाव करते हुए पायलटों और अन्य क्रू सदस्यों के रैंडम परीक्षण की सीमा को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत से अधिक करने पर विचार कर रहा है।

विमान संचालन में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विमान चालकों और केबिन क्रू की कार्यक्षमता, सतर्कता और मानसिक स्थिति की नियमित जांच की जाती है। अब मंत्रालय का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि उड़ान से जुड़े सभी कर्मचारी पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित स्थिति में ड्यूटी पर मौजूद रहें।

सूत्रों के मुताबिक, हाल के दिनों में हुई विमान घटनाओं के बाद विमान चालक दल के परीक्षण और निगरानी को लेकर चर्चा तेज हुई है। विमानन क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। ऐसे में सरकार सुरक्षा मानकों को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है।

हाल ही में फुकेत से दिल्ली आ रहे एयर इंडिया के एक विमान में उड़ान के दौरान अचानक तेज हलचल की घटना सामने आई थी। बताया गया कि विमान हवा में भारी झटकों का सामना करते हुए करीब 300 फीट नीचे आ गया था। इस घटना में 24 यात्री घायल हो गए थे। हादसे के बाद विमान संचालन में सुरक्षा उपायों और क्रू सदस्यों की तैयारी को लेकर सवाल उठे थे।

विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि पायलट और क्रू सदस्यों की मानसिक और शारीरिक स्थिति उड़ान सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन या उसका प्रभाव विमान संचालन के दौरान गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए नियमित और आकस्मिक जांच व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।

मौजूदा नियमों के तहत एयरलाइंस और विमानन कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए रैंडम ड्रग टेस्टिंग करनी होती है। इसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि कोई कर्मचारी प्रतिबंधित या मादक पदार्थों का सेवन तो नहीं कर रहा है। अब परीक्षण का प्रतिशत बढ़ाने से ज्यादा संख्या में कर्मचारियों की जांच हो सकेगी।

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) भी विमानन सुरक्षा को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी करता रहा है। विमान कंपनियों को सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए जाते हैं। अगर कोई कर्मचारी जांच में दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रैंडम टेस्टिंग बढ़ाने से क्रू सदस्यों में जिम्मेदारी और सतर्कता बढ़ेगी। इससे यात्रियों का भरोसा भी मजबूत होगा। हालांकि, विमानन क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और वैज्ञानिक तरीके से लागू किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी कर्मचारी के अधिकार प्रभावित न हों।

विमानन उद्योग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से विस्तार कर रहा है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ ही सुरक्षा मानकों को बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में सरकार लगातार नए सुरक्षा उपायों को लागू करने पर जोर दे रही है।

फ्लाइट क्रू के लिए मादक पदार्थ परीक्षण बढ़ाने का प्रस्ताव इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अगर मंत्रालय इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है तो आने वाले समय में अधिक संख्या में पायलटों और क्रू सदस्यों की जांच की जाएगी। इससे विमान संचालन में सुरक्षा स्तर को और बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर उड़ान में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि रहे। आकस्मिक जांच की संख्या बढ़ने से न केवल नियमों का पालन मजबूत होगा, बल्कि विमानन क्षेत्र में सुरक्षा संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

Next Story